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कैसे भारत चुपचाप दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी AI ताकत बन गया

Published On: दिसम्बर 15, 2025
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स्टैनफोर्ड रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक AI रैंकिंग में भारत का तीसरा स्थान
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स्थान: नई दिल्ली, भारत | तारीख: 14 दिसंबर 2025 |पढ़ने का समय: लगभग 4 मिनट

सारांश

स्टैनफोर्ड रिपोर्ट ने भारत के AI उभार पर क्यों लगाई मुहर?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में भारत ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी चर्चा अब दुनिया भर में हो रही है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के Global AI Vibrancy Tool के अनुसार, भारत अब AI प्रतिस्पर्धा में दुनिया का तीसरा सबसे मजबूत देश बन चुका है। इस सूची में भारत ने ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों को पीछे छोड़ दिया है।

Read In English- India Leaps to Third in Global AI Competitiveness: Stanford Report Highlights Talent-Driven Rise

यह उछाल किसी एक नीति या एक कंपनी की वजह से नहीं आया। इसके पीछे वर्षों से तैयार हो रहा AI टैलेंट, मजबूत इंजीनियरिंग आधार और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम है।

AI टैलेंट बना भारत की सबसे बड़ी ताकत

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी मजबूती उसका मानव संसाधन है। देश में हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और AI रिसर्चर तैयार हो रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियां अपने AI रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए भारत की ओर देख रही हैं।

भारतीय प्रोफेशनल्स न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी AI प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर रहे हैं। यह टैलेंट नेटवर्क भारत को AI वैल्यू चेन में एक अहम स्थान दिला रहा है।

रिसर्च और इनोवेशन में भी बढ़ी भारत की पकड़

भारत का प्रदर्शन सिर्फ टैलेंट तक सीमित नहीं है। AI से जुड़े रिसर्च पेपर्स, पेटेंट फाइलिंग और ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स में भी देश की भागीदारी लगातार बढ़ी है। स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि भारत अब AI रिसर्च आउटपुट के मामले में भी टॉप देशों में शामिल हो चुका है।

विश्वविद्यालयों, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के बीच बढ़ता सहयोग इस प्रगति को और गति दे रहा है।

निवेश और स्टार्टअप्स ने दी रफ्तार

पिछले कुछ वर्षों में भारत के AI स्टार्टअप्स में निवेश तेजी से बढ़ा है। हेल्थटेक, फिनटेक, एग्रीटेक और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में AI का व्यावहारिक इस्तेमाल हो रहा है। इससे न सिर्फ नई कंपनियां उभर रही हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर तकनीक को अपनाया भी जा रहा है।

यही वजह है कि भारत अब केवल एक टैलेंट सप्लायर नहीं, बल्कि AI समाधान विकसित करने वाला देश बनता जा रहा है।

यह बदलाव क्यों अहम है

भारत का तीसरे स्थान पर पहुंचना एक संकेत है कि वैश्विक AI शक्ति संतुलन बदल रहा है। अब AI की दुनिया सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रही। भारत की यह स्थिति भविष्य में तकनीकी नीति, वैश्विक साझेदारी और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है।

यह उभार दिखाता है कि अगर टैलेंट, रिसर्च और निवेश सही दिशा में जुड़ें, तो भारत आने वाले वर्षों में AI नेतृत्व की भूमिका में भी नजर आ सकता है।

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